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सुनहरी यादें : 2011 वनडे विश्व कप: धोनी की कप्तानी में भारत ने 28 साल बाद उठाया विश्व कप

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पटियाला, 09 मार्च (शाही)

2011 आईसीसी क्रिकेट विश्व कप (भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश द्वारा सह-मेजबानी, 19 फरवरी से 2 अप्रैल 2011 तक) ने भारत को अपना दूसरा वनडे विश्व कप दिलाया, जो 1983 की ऐतिहासिक जीत के 28 साल बाद आया। कप्तान एमएस धोनी की अगुवाई में भारत ने घरेलू मैदान पर पहली बार विश्व कप फाइनल जीता और श्रीलंका को वानखेड़े स्टेडियम, मुंबई में 6 विकेट से हराया। यह जीत भावनात्मक रूप से खास थी क्योंकि सचिन तेंदुलकर का लंबे इंतजार खत्म हुआ, साथ ही विस्फोटक बल्लेबाजी और नॉकआउट में क्लच परफॉर्मेंस यादगार रही।

टूर्नामेंट का संदर्भ और भारत का सफर

  • उपमहाद्वीप में सह-मेजबानी, 14 टीमें, 50 ओवर फॉर्मेट।
  • भारत ने ग्रुप बी में टॉप किया (6 में से 5 मैच जीते, सिर्फ दक्षिण अफ्रीका से हारे)।
  • ग्रुप स्टेज प्रमुख जीतें: बांग्लादेश (87 रन), इंग्लैंड (बारिश से प्रभावित चेज में 8 विकेट), आयरलैंड (8 विकेट), नीदरलैंड्स (5 विकेट), वेस्ट इंडीज (80 रन)।
  • क्वार्टर फाइनल: ऑस्ट्रेलिया को 5 विकेट से हराया (261 का पीछा; विराट कोहली 24*, युवराज सिंह नाबाद कैमियो)।
  • सेमीफाइनल: मोहाली में पाकिस्तान को 29 रन से हराया (गौतम गंभीर 57, विराट कोहली 9; गेंदबाजी से पाकिस्तान को 261 के पीछे 231 पर रोका)।
  • टीम में अनुभव (तेंदुलकर, द्रविड़, सहवाग) और युवा (कोहली, रैना) + ऑलराउंडर (युवराज, धोनी) का शानदार मिश्रण था।

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फाइनल: भारत बनाम श्रीलंका (2 अप्रैल 2011, वानखेड़े स्टेडियम, मुंबई)

  • टॉस: श्रीलंका ने जीता और पहले बल्लेबाजी चुनी (डे-नाइट मैच)।
  • श्रीलंका की पारी: 274/6 (50 ओवर)
    • महेला जयवर्धने: 103* (88 गेंदें, 13 चौके) — शानदार शतक।
    • कुमार संगकारा: 48 (67 गेंदें)।
    • तिलकरत्ने दिलशान: 18, बाकी योगदान कम।
    • भारत की गेंदबाजी: जहीर खान 2/60 (10 ओवर), युवराज सिंह 2/49 (10 ओवर), बाकी किफायती।
    • विकेट गिरने: शुरुआती झटके (17/1 थरंगा, 60/2 दिलशान, 122/3 संगकारा), लेकिन जयवर्धने ने अंत तक संभाला।
  • भारत की पारी: 277/4 (48.2 ओवर) — 275 का पीछा 10 गेंद बाकी रहते पूरा किया।
    • गौतम गंभीर: 97 (122 गेंदें) — शुरुआती संकट के बाद हीरोइक एंकर।
    • एमएस धोनी: 91* (79 गेंदें, जीत दिलाने वाला छक्का) — खुद को नंबर 5 पर प्रमोट किया, कप्तानी पारी।
    • विराट कोहली: 35।
    • युवराज सिंह: 21* (मैच खत्म किया)।
    • प्रमुख साझेदारी: गंभीर-धोनी की 83 रन की चौथी विकेट साझेदारी ने चेज मोड़ दिया।
    • विकेट गिरने: सहवाग 0, तेंदुलकर 18, कोहली 35 (116/3), गंभीर 97 (221/4)।
    • श्रीलंका की गेंदबाजी: लसिथ मलिंगा 2/42 (9 ओवर), बाकी ने दबाव बनाया लेकिन साझेदारी नहीं तोड़ी।
  • परिणाम: भारत ने 6 विकेट से जीत हासिल की — उस समय विश्व कप फाइनल में सबसे बड़ा सफल चेज।
  • ड्रामेटिक फिनिश: धोनी ने नुवान कुलशेखरा की गेंद पर लॉन्ग-ऑन के ऊपर छक्का लगाया। हेलमेट उतारकर लंबे बाल दिखाए — आइकॉनिक पल! पूरे देश में जश्न।

मैन ऑफ द मैच: एमएस धोनी (91* — दबाव में शांत और मैच जिताने वाली पारी)। टूर्नामेंट का प्लेयर: युवराज सिंह (पूरे टूर्नामेंट में लगातार ऑलराउंड प्रदर्शन: 362 रन + 15 विकेट)।

प्रमुख पल और प्रभाव

  • सचिन तेंदुलकर का भावुक सफर (उनका 6ठा विश्व कप) ट्रॉफी के साथ खत्म हुआ।
  • पाकिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल क्रिकेट के सबसे तनावपूर्ण मैचों में से एक था।
  • भारत की बल्लेबाजी गहराई और गेंदबाजी विविधता (जहीर, अश्विन, युवराज) पूरे टूर्नामेंट में चमकी।
  • इस जीत ने धोनी को भारत के महानतम कप्तानों में से एक बनाया और टीम का भविष्य के आईसीसी इवेंट्स के लिए आत्मविश्वास बढ़ाया।
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