पटियाला, 30 जून
उत्तरी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (NZCC) और पंजाब कला परिषद के सहयोग से रंगमंच के क्षेत्र में स्थापित संस्था ‘नाटक वाला’ द्वारा प्रेम प्रकाश सिंह धालीवाल की स्मृति में आयोजित तीन दिवसीय 23वां ग्रीष्मकालीन नाट्य महोत्सव कालिदास ऑडिटोरियम, पटियाला में शानदार ढंग से सम्पन्न हुआ। अंतिम दिन मोहन राकेश द्वारा लिखित और राजेश शर्मा द्वारा निर्देशित हिंदी नाटक ‘आधे-अधूरे’ का मंचन किया गया। इस अवसर पर पंजाब भाषा विभाग के निदेशक जसवंत सिंह जफर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
समापन समारोह
महोत्सव के अंतिम दिन प्रख्यात चिंतक डॉ. स्वराज सिंह, प्रसिद्ध रंगकर्मी पद्मश्री प्राण सभरवाल, मोहन कंबोज, वरिंदर घुम्मन, परमिंदरपाल कौर, मानवता घुम्मन, गुरनंदन घुम्मन और गुलजार पटियालवी सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। कविता शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि मंच संचालन की जिम्मेदारी सुरिंदर बाठ ने निभाई।
मुख्य अतिथि का संबोधन
मुख्य अतिथि जफर ने ‘नाटक वाला’ समूह के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि नाटक एक ऐसी कला है जो दर्शकों पर स्थायी प्रभाव छोड़ती है और कठिन परिश्रम की मांग करती है। “एक उत्कृष्ट प्रस्तुति दर्शकों के मन में लंबे समय तक रहती है और उनका मार्गदर्शन भी करती है। यह नाटक हमें सिखाता है कि हम अपने दुखों का समाधान दूसरों में ढूंढते हैं, जबकि वह हमारे भीतर ही होता है। हमें अपनी पहचान को समझना चाहिए।” उन्होंने पंजाब भाषा विभाग की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। साथ ही, उन्होंने नाटक के लेखक मोहन राकेश की 100वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
नाटक ‘आधे-अधूरे’ की प्रस्तुति
‘आधे-अधूरे’ की कहानी एक परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां परिवार के सदस्य एक-दूसरे में कमियां देखते हैं, लेकिन अपनी कमियों को नजरअंदाज करते हैं। इससे परिवार टूटने की कगार पर पहुंच जाता है। नाटक यह संदेश देता है कि हमें अपनी पहचान को समझना और यह देखना चाहिए कि हम कितने पूर्ण या अधूरे हैं। यह समझ सामाजिक समस्याओं का सहज समाधान कर सकती है।
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कलाकार और तकनीकी दल
- निर्देशक और अभिनेता: राजेश शर्मा ने नाटक में महिंदर, जगमोहन, सिंहानिया, जुनेजा और काले सूट वाले व्यक्ति की पांच भूमिकाएं बखूबी निभाईं।
- अन्य कलाकार:
- कविता शर्मा (सवित्री)
- प्रभास पंडित (पुत्र)
- चितवान मान (बड़ी बेटी)
- हरप्रीत (छोटी बेटी)
- सेट डिजाइन: सनी, कैलाश, और नरिंदर सिंह
- प्रकाश संचालन: हर्ष सेठी
- जानकारी: लवप्रीत कसियाना
महोत्सव का महत्व
23वां ग्रीष्मकालीन नाट्य महोत्सव ने न केवल प्रेम प्रकाश सिंह धालीवाल की विरासत को सम्मान दिया, बल्कि रंगमंच के माध्यम से सामाजिक और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा दिया। ‘आधे-अधूरे’ की प्रस्तुति ने दर्शकों को आत्म-चिंतन के लिए प्रेरित किया, जिससे यह उत्सव एक यादगार और प्रेरणादायक अनुभव बन गया।
