चंडीगढ़, 21 सितंबर
दिल्ली में उच्च संवैधानिक और निर्वाचित पदों पर रह चुकी प्रतिष्ठित हस्तियों को नोटिस जारी किए जाने की खबरों के बीच पंजाब की मतदाता सूची को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। करन बीर सिंह सिद्धू ने कहा है कि पंजाब में 20 लाख से अधिक मतदाताओं को 13 अगस्त को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरी प्रविष्टि वाला बताकर बाहर रखा गया है।
करन बीर सिंह सिद्धू ने सोमवार को कहा कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम प्रारूप मतदाता सूची से बाहर रह गए हैं, वे फॉर्म-6 भरकर मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो नागरिक प्रारूप सूची में शामिल हैं, लेकिन जिन्हें नोटिस जारी किए गए हैं, उनमें कोई दोष नहीं है। उनके अनुसार, समस्या पुनरीक्षण प्रक्रिया में लगाई गई उस शर्त से जुड़ी है, जिसके तहत मतदाता की वर्तमान प्रविष्टि को 2002-03 की मतदाता सूची में उसके माता-पिता की प्रविष्टि से मिलाना यानी ‘मैपिंग’ अनिवार्य किया गया है।
1984 बैच के आईएएस अधिकारी और पंजाब सरकार के विशेष मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त करन बीर सिंह सिद्धू चुनाव कानून के तहत चुनावी प्रक्रिया के विभिन्न स्तरों पर वैधानिक जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वे पीठासीन अधिकारी से लेकर जिला निर्वाचन अधिकारी, अमृतसर तक की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसी भूमिका में वे अमृतसर और तरनतारन संसदीय क्षेत्रों के रिटर्निंग ऑफिसर भी रह चुके हैं। इसके अलावा वे लगातार तीन लोकसभा चुनावों में भारत निर्वाचन आयोग के चुनाव पर्यवेक्षक भी रहे हैं।
पंजाब में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 12 सितंबर को समाप्त हो चुकी है। इनका निपटारा 8 अक्टूबर तक किया जाना है, जबकि अंतिम मतदाता सूची 12 अक्टूबर को प्रकाशित होने वाली है।
करन बीर सिंह सिद्धू ने कहा कि फॉर्म-6 किसी पुनरीक्षण कैलेंडर तक सीमित सुविधा नहीं है, बल्कि मतदाता के रूप में पंजीकरण का सामान्य माध्यम है। उनके अनुसार, यह 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके प्रत्येक भारतीय नागरिक के लिए उपलब्ध है, बशर्ते वह संबंधित क्षेत्र का सामान्य निवासी हो। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि तक जारी रहती है।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 326 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए मूल शर्तें नागरिकता, 18 वर्ष की आयु पूरी होना और संबंधित क्षेत्र का सामान्य निवासी होना हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कानून में निर्धारित सीमित अयोग्यताओं के अतिरिक्त किसी प्रशासनिक निर्देश के माध्यम से नई शर्त नहीं जोड़ी जा सकती।
सिद्धू ने अनुच्छेद 326 में इस्तेमाल किए गए ‘हकदार’ (entitled) शब्द का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदाता के रूप में पंजीकरण का अधिकार किसी प्राधिकारी की ओर से दी गई सुविधा नहीं है। उनके अनुसार, इसे किसी सॉफ्टवेयर द्वारा किए गए मिलान के आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा, “सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार संविधान द्वारा दिया गया एक संवैधानिक अधिकार है। यह निर्वाचन आयोग द्वारा दी गई कोई ख़ैरात नहीं है, जिसे उसका सॉफ्टवेयर जब चाहे दे या रोक दे।”
उन्होंने दिल्ली में नोटिस पाने वालों के संदर्भ में कहा कि इस सूची में एक पूर्व उप प्रधानमंत्री, एक वर्तमान केंद्रीय मंत्री, राज्यसभा के एक वर्तमान सदस्य और एक वर्तमान निर्वाचन आयुक्त भी शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा सदस्य के गणना प्रपत्र की जांच बूथ लेवल अधिकारी द्वारा की गई थी और उस पर हस्ताक्षर भी किए गए थे।
पंजाब में अगले वर्ष की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए सिद्धू ने राज्य के सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे केवल अलग-अलग मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामलों तक सीमित न रहें, बल्कि पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल कराने पर भी ध्यान दें। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में जुड़ने वाला प्रत्येक पात्र नागरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है, चाहे वह भविष्य में किसी भी राजनीतिक दल को वोट दे।
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सिद्धू ने भारत निर्वाचन आयोग से भी अपील की कि वह संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह स्पष्ट करे कि सितंबर की अंतिम तिथि निकल जाने के बाद भी पंजाब के पात्र मतदाता फॉर्म-6 दाखिल कर सकते हैं और उनके पास केवल अपीलीय प्रक्रिया का ही विकल्प सीमित नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था उन मामलों में लागू होनी चाहिए, जहां सक्षम निर्वाचन प्राधिकारी ने व्यक्ति की नागरिकता के संबंध में कोई ठोस निष्कर्ष दर्ज नहीं किया है।





