पटियाला, 14 सितंबर
भाषा विभाग, पंजाब की ओर से हिंदी दिवस के अवसर पर भाषा भवन में एक प्रभावशाली साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रबुद्ध कहानीकारों ने अपनी कहानियों का पाठ किया, जबकि साहित्य विशेषज्ञों ने कहानी कला के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिरिक्त निदेशक चंदनदीप कौर के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने विभाग की ओर से हिंदी भाषा और साहित्य को बढ़ावा देने के लिए आयोजित की जा रही विभिन्न गतिविधियों पर प्रकाश डाला।
प्रसिद्ध कहानीकार डॉ. धर्मपाल साहिल ने अपनी कहानी ‘पिंड दान’ के पाठ से कार्यक्रम की शुरुआत की। कहानी के माध्यम से उन्होंने सामाजिक सरोकारों और पारिवारिक उलझनों को सरल एवं संक्षिप्त ढंग से प्रस्तुत किया। कहानी में पात्रों का प्रभावी चित्रण और सधा हुआ कथानक विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
इसके बाद डॉ. मीनाक्षी वर्मा ने अपनी कहानी ‘गौ-धली’ का पाठ किया। कहानी में पति-पत्नी के आपसी संबंधों को केंद्र में रखते हुए यह दर्शाया गया कि गंभीर संकट की परिस्थितियों में भी पति-पत्नी की बेहतर समझ और साझेदारी अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सही निर्णय लेने में मदद कर सकती है। कहानी में महिला के अंतर्मन की उथल-पुथल और भावनात्मक संघर्ष को भी प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया गया।
watch…..ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਹਰ ਅੰਡਰ-ਗ੍ਰੈਜੂਏਟ ਵਿਦਿਆਰਥੀ ਲਈ ਇਤਿਹਾਸ ਤੇ ਵਿਰਸੇ ਦਾ ਕੋਰਸ ਲਾਜ਼ਮੀ ਕਰਨ ਦੀ ਤਜਵੀਜ਼
साहित्य सीमाओं से परे जोड़ता है: प्रो. राकेश कुमार
अध्यक्षीय भाषण में प्रो. राकेश कुमार ने कहा कि दुनिया के देशों के बीच भले ही भौगोलिक सीमाएं हों, लेकिन साहित्यकार अपनी रचनाओं के माध्यम से इन सीमाओं को पार करते हुए पूरी दुनिया को एक सूत्र में जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं और इसमें सफल भी हो रहे हैं।
कहानी कला पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदी कहानी की परंपरा उतनी ही पुरानी है जितनी मानव सभ्यता। कहानियों का मनुष्य के साथ एक जैविक संबंध है। वे हमारे आसपास हवा की तरह मौजूद रहती हैं और लेखक उन्हें शब्दों के माध्यम से कागज पर उतारकर अमर बना देते हैं।
उन्होंने कहा कि आज की कहानियों से रवानगी, जो कहानी का मूल तत्व है, कम होती जा रही है। कहानी का कथ्य और भाषा शब्दों की नदी की तरह प्रवाहमान होनी चाहिए, जो पाठक को अपने साथ बहाकर नई भावनाओं और अनुभवों से जोड़ दे।
प्रो. राकेश कुमार ने कहा कि भाषा विभाग कई पारंपरिक सीमाओं को तोड़ते हुए नई राहें बना रहा है। विभाग साहित्य की विभिन्न विधाओं से जुड़े उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, जिससे उसकी गतिविधियों का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
भाषाओं में टकराव नहीं, आपसी जुड़ाव है: नवीन कमल भारती
मुख्य अतिथि नवीन कमल भारती ने कहा कि भाषाओं के बीच किसी प्रकार का टकराव नहीं होता, बल्कि वे एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और एक-दूसरे की पूरक भी हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब की धरती पर वेदों की रचना हुई और भारत की अनेक भाषाओं के विकास में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसलिए हमें सभी भाषाओं का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने भाषा विभाग के साथ अपने पुराने जुड़ाव और अनुभवों को भी साझा किया।
कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक एवं कार्यक्रम की संचालक देविंदर कौर ने किया। इस अवसर पर विभाग के हिंदी अनुभाग की सेवानिवृत्त सहायक निदेशक श्रीमती मोहिनी चावला को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में निदेशक भाषाएं जसवंत सिंह ज़फ़र ने कहानीकारों और अतिथियों को विभाग की ओर से शॉल एवं पुस्तकों से सम्मानित किया।
इस अवसर पर उपनिदेशक आलोक चावला, सहायक निदेशक सुरिंदर कौर, जसप्रीत कौर, राबिया, पीएसपीएल के पूर्व निदेशक डी.पी. सिंह ग्रेवाल, हरजीत सिंह सोही, इंजीनियर जतिंदर सिंह, विभाग के पूर्व सहायक निदेशक बाबू राम दीवान एवं हरनेक सिंह ढोट, पत्रकार गुरनाम सिंह अकीदा, कविशर भीम सिंह एवं उनके साथी तथा बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।





