Homeहिंदीधर्मपाप, बाधाओं की मुक्तिदायनी, दिव्य शक्ति की स्वामिनी मां चंद्रघंटा

पाप, बाधाओं की मुक्तिदायनी, दिव्य शक्ति की स्वामिनी मां चंद्रघंटा

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-शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा का पूजन

पटियाला, 05 अक्टूबर (शाही)

अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना करने वाली मां दुर्गा के तीसरे स्वरुप मां चंद्रघंटा की स्तुति, पूजा अर्चना शारदीय नवरात्रि में कर सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। दिव्य शक्ति की स्वामिनी मां चंद्रघंटा भक्तों के सभी पाप, बाधाओं का नाश करती है। मां चंद्रघंटा का पूजन कर उनका आशीर्वाद पाया जा सकता है।

नवरात्रि के तीसरे दिन माता की स्तुति के लिए करें इस मंत्र का जाप

या देवी सर्वभूतेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

अर्थ : हे माता! सर्वत्र विराजमान और चंद्रघंटा के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ। हे माता, मुझे सब पापों से मुक्ति प्रदान करें।

मां चंद्रघंटा का पावन स्वरुप

शक्ति की स्वामिनी, दुष्टों का नाश करने वाली मां दुर्गा की तीसरी शक्ति का रुप मां चंद्रघंटा का यह स्वरूप परम कल्याणकारी है। माता की कृपा से आलौकिक चीजों के दर्शन होते हैं। माता के पूजन से दिव्य सुगंधियां, दिव्य ध्वनियां भक्तों के मन को आनंदित करती हैं। मस्तक पर घंटे का आकार का अर्धचंद्र धारण करने की वजह से उन्हें माता चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। स्वर्ण रंग समान चमकीले शरीर वाली माता के दस हाथ हैं। माता अपने दसों हाथों में खड़ग, शस्त्र तथा बाण धारण किए रहती हैं। सिंह पर सवार माता की मुद्रा हमेशा युद्ध करने की दिखाई देती है।

इसे भी जरुर देखें……माता दुर्गा का पहला स्वरुप “मां शैलपुत्री”

कैसे पाएं माता का आशीर्वाद

सच्चे मन से पूजा करने पर मां चंद्रघंटा के आशीर्वाद से भक्त सभी पापों और बाधाओं से मुक्ति पाता है। माता भक्तों के कष्ट को हरती है। भक्त भी सिंह सवार पर माता की तरह ही निर्भीक हो जाता है। माता के घंटे की ध्वनि अपने भक्तों को अंजाने भय से भी रक्षा दिलाती है। सौम्य और शांति के स्वरुप वाली माता की आराधना से भक्त में विनम्रता का विकास, मुख, आंखों में तेज की वृद्धि होती है।

पूजा

नवरात्रि के तीसरे दिन भक्त मां चंद्रघंटा समान सांवली रंग की विवाहित महिला का पूजन करना चाहिए। भोजन में दही और हलवा खिलाएं। भेंट में कलश और मंदिर की घंटी जरुर भेंट करें।

आरती 

नवरात्रि के तीसरे दिन चंद्रघंटा का ध्यान।

मस्तक पर है अर्ध चन्द्र, मंद मंद मुस्कान॥

दस हाथों में अस्त्र शस्त्र रखे खडग संग बांद।

घंटे के शब्द से हरती दुष्ट के प्राण॥

सिंह वाहिनी दुर्गा का चमके सवर्ण शरीर।

करती विपदा शान्ति हरे भक्त की पीर॥

मधुर वाणी को बोल कर सब को देती ग्यान।

जितने देवी देवता सभी करें सम्मान॥

अपने शांत सवभाव से सबका करती ध्यान।

भव सागर में फसा हूँ मैं, करो मेरा कल्याण॥

नवरात्रों की माँ, कृपा कर दो माँ।

जय माँ चंद्रघंटा, जय माँ चंद्रघंटा॥

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