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आज के समाज में नारी की स्थिति की सटीक प्रस्तुति “मुझे अमृता चाहिए”

पटियाला, 27 मार्च

उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनजेडसीसी), पटियाला (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) और कला कृत्ति, पटियाला (रजि.) के संयुक्त तत्वावधान में विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर नाटक “मुझे अमृता चाहिए” का आयोजन किया गया। योगेश त्रिपाठी द्वारा लिखित इस नाटक का संपादन और निर्देशन प्रसिद्ध रंगमंच अभिनेत्री व निर्देशिका परमिंदर पाल कौर ने किया।

“मुझे अमृता चाहिए” नाटक आज के समाज में नारी की स्थिति को उजागर करता है और साथ ही रंगमंच को व्यक्तित्व निर्माण के लिए एक आवश्यक साधन के रूप में स्थापित करता है। नाटक की नायिका विजया, एक साधारण किशोरी, जो बढ़ती उम्र में लगातार उपेक्षा से हताश और जीवन से निराश रहती है। लेकिन जब उसे अचानक एक नाटक में अभिनय का अवसर मिलता है, तो उसके व्यक्तित्व में अप्रत्याशित बदलाव आता है और वह खुद को समाज में एक उपयोगी इकाई के रूप में देखने लगती है। यह नाटक रंगमंच के महत्व को रेखांकित करने वाला एक उत्सवपूर्ण प्रदर्शन भी है।

नाटक में रवि भूषण, दलबीर दिल्ल, अंजू सैनी, गोपाल शर्मा, मंशा, लक्ष शर्मा, निर्मल सिंह, बलजीत सिंह, एम.एम. स्याल, सिमरन और अंजलि जैसे कलाकारों ने अभिनय किया। प्रकाश व्यवस्था (लाइट डिजाइन) हरमीत सिंह ने संभाली, संगीत हरजीत गुड्डू ने दिया, जबकि कलाकारों का मेकअप कुलदीप सिंह ने किया। मंच का कुशल संचालन डॉ. मंजू अरोड़ा और पूनम शर्मा ने किया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. वसुधा और सहस्रबुद्धि, जो रंगमंच और हिंदी नाटक जगत की जानी-मानी हस्तियां हैं, उपस्थित थीं। उन्होंने दर्शकों के साथ विश्व रंगमंच दिवस के महत्व पर अपने विचार साझा किए और इस आयोजन के लिए उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, पटियाला के निदेशक मोहम्मद फुरकान जी की सराहना की।

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