पटियाला (11 मई)
पंजाबी की झोली में बहुमूल्य साहित्य को डालने वाले पंजाबी शायर, साहित्यकार, कवि, लेखक, विद्वान, चिंतक सुरजीत पातर ने इस फानी दुनिया को अलविदा कह दिया। उनकी रचनाओं को कई गायकों ने अपनी आवाज देकर उसे हमेशा के जीवंत किया हुआ है।

बेहद नर्म स्वभाव वाले, सदा प्यार से मिलने वाले सुरजीत पातर का असला नाम सुरजीत हुंजन था। 14 जनवरी, 1945 को गांव पत्तड़ में जन्म लेने वाले सुरजीत पातर का निधन आज 11 मई को हुआ। गांव के नाम के कारण ही उन्होंने अपने नाम के साथ हुंजन के स्थान पातर को तख्ल्लुस के तौर पर अपना लिया। रणधीर कॉलेज, कपूरथला से स्नातक की उपाधि प्राप्त करने वाले सुरजीत पातर ने पंजाबी विश्वविद्यालय , पटियाला से मास्टर डिग्री प्राप्त की। और फिर गुरु नानक देव विश्वविद्यालय , अमृतसर से “गुरु नानक वाणी में लोककथाओं के परिवर्तन” विषय पर साहित्य में पीएचडी की । इसके बाद वह अकादमिक पेशे में शामिल हो गए और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय , लुधियाना से पंजाबी के प्रोफेसर के रूप में सेवानिवृत्त हुए । [उन्होंने साठ के दशक के मध्य में कविता लिखना शुरू किया। उनकी कविताओं में “हवा लिखे हर्फ” (हवा में लिखे शब्द), बिरख अर्ज़ करे (इस प्रकार पेड़), हनेरे विच सुलगदी वर्णमाला (अंधेरे में सुलगते शब्द), लफज़ान दी दरगाह (शब्दों का तीर्थ) शामिल हैं। , पतझर दी पाज़ेब (शरद ऋतु की पायल) और सुरज़मीन (संगीत भूमि) प्रमुक हैं।
उन्होंने फेडेरिको गार्सिया लोर्का की तीन त्रासदियों , गिरीश कर्नाड के नाटक नागमंडला और बर्टोल्ट ब्रेख्त और पाब्लो नेरुदा की कविताओं का पंजाबी में अनुवाद किया है । उन्होंने जीन जिराडौक्स, यूरिपिड्स और रैसीन के नाटकों को भी रूपांतरित किया है । उन्होंने शेख फरीद से लेकर शिव कुमार बटालवी तक पंजाबी कवियों पर टेली-स्क्रिप्ट लिखी हैं पंजाब कला परिषद, चंडीगढ़ के अध्यक्ष रहे सुरजीत पातर ने पंजाबी साहित्य अकादमी, लुधियाना के अध्यक्ष का पद भी संभाला है । वर्ष 2012 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया । उनकी कलम से निकली रचनाओं में “मोमबत्तियाँ”, “हनेरे विच सुलगदी वरनमाला”, “आइया नंद किशोर”,] “हनेरा जरेगा किवें”, “फसला”, “कोई दलिया चो लंगेया हवा बन के” बेहद खास हैं। सुरजीत पातर ने पंजाबी फिल्म शहीद उधम सिंह और विदेश , दीपा मेहता की फिल्म हेवन ऑन अर्थ का पंजाबी संस्करण के संवाद लिखे हैं ।
- 1979: पंजाब साहित्य अकादमी पुरस्कार
- 1993: हनेरे विच सुलघडी वर्णमाला के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार
- 1999: भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता द्वारा पंचनद पुरस्कार
- 1999: भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता
- 2007-2008: अनाद काव सन्मान
- 2009: केके बिड़ला फाउंडेशन द्वारा सरस्वती सम्मान
- 2009: कविता के लिए गंगाधर राष्ट्रीय पुरस्कार, संबलपुर विश्वविद्यालय, उड़ीसा
- 2012: साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में पद्म श्री पुरस्कार (भारत गणराज्य में चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार)
- 2014: कुसुमाग्रज साहित्यिक पुरस्कार
आनलाईनटीवी चैनल सुरजीत पातर के आक्समिक निधन पर श्रद्धासुमन भेंट करता है। उनकी साहित्य की अनमोल देन को साहित्य प्रेमी हमेशा याद रखेंगे।





