
-कर्दम ऋषि के 10 हजार वर्षों के तप का फल है यह सरोवर
पटियाला, 25 सितंबर (प्रदीप शाही)
बिंदू सरोवर भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है, जो विशेष रूप से माता के मोक्ष से जुड़ा हुआ है। यह सरोवर गुजरात के ऐतिहासिक शहर सिद्धपुर में स्थित है।
सरोवर का महत्व और उत्पत्ति
- ऋषि कर्दम का तप: हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, बिंदू सरोवर की उत्पत्ति ऋषि कर्दम के दस हजार वर्षों के कठोर तप के फलस्वरूप हुई थी। कर्दम ऋषि को भगवान ब्रह्मा की छाया से उत्पन्न माना जाता है।
- प्राचीन ग्रंथों में उल्लेख: ऋग्वेद, रामायण और महाभारत जैसे प्राचीन ग्रंथों में भी बिंदू सरोवर का उल्लेख मिलता है, जो इसकी प्राचीनता और महत्व को दर्शाता है।
- माता के मोक्ष का स्थल: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिंदू सरोवर को माता के मोक्ष का स्थल माना जाता है। यहां पुत्र अपनी माता के मोक्ष के लिए विशेष अनुष्ठान करते हैं।
कपिल मुनि और माता देवहुति की कहानी
कपिल मुनि, जो भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं, महर्षि कर्दम और देवहुति के पुत्र थे। जब कर्दम ऋषि तपस्या में लीन हो गए, तो देवहुति बहुत दुखी हुईं। कपिल मुनि ने अपनी माता को सांख्य दर्शन का उपदेश दिया और उन्हें भगवान विष्णु में ध्यान लगाने के लिए प्रेरित किया। बाद में, देवहुति का देहांत हो गया। कपिल मुनि ने अपनी माता के मोक्ष के लिए इसी सरोवर के तट पर विशेष अनुष्ठान किया, जिसके बाद से यह स्थान माता के मोक्ष के लिए प्रसिद्ध हो गया।
कार्तिक माह का महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह में बिंदू सरोवर में एक विशाल मेला आयोजित किया जाता है। इस दौरान, बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आकर अपनी माता के मोक्ष के लिए अनुष्ठान करते हैं।

अन्य पवित्र सरोवर
बिंदू सरोवर के अलावा, भारत में कई अन्य पवित्र सरोवर हैं, जैसे कि कैलाश मानसरोवर, नारायण सरोवर, पुष्कर सरोवर और पंपा सरोवर। ये सरोवर भी हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखते हैं।

बिंदू सरोवर मात्र एक सरोवर नहीं, बल्कि यह आस्था और श्रद्धा का एक केंद्र है। यह सरोवर माता-पुत्र के पवित्र बंधन को दर्शाता है और हिंदू धर्म की आस्थाओं और परंपराओं को जीवंत रखता है। माता जाता है कि भगवान परशुराम ने भी अपनी माता का श्राद्ध सिद्धपुर में बिंदु सरोवर के तट पर ही किया था। बिंदु सरोवर के किनारों पर पत्थर के घाट बनाये गए है। भगवान परशुराम का आश्रम भी निकट है। पास ही मोक्ष पीपल है। जहां पुत्र अपनी माता के मोक्ष के लिए प्रार्थना करते है।
अतिरिक्त जानकारी:
- स्थान: गुजरात के सिद्धपुर में स्थित
- महत्व: माता के मोक्ष के लिए प्रसिद्ध
- कथाएं: ऋषि कर्दम, कपिल मुनि और देवहुति से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं
- त्यौहार: कार्तिक माह में विशाल मेला




