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वक्त बदल गया, पर मोहब्बत का रंग वही रहा….”ढाई आखर प्रेम का” नाटक का सफल मंचन 

पटियाला, 10 मार्च

उत्तर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार), पटियाला द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर काली दास ऑडिटोरियम, विरसा विहार केंद्र में जयपुर की कलंदर सोसाइटी के कलाकारों ने “ढाई आखर प्रेम का” नाटक का शानदार और सफल मंचन किया। केंद्र के निदेशक एम. फुरकान खान की अगवानी में आयोजित इस कार्यक्रम में कलाकारों के उत्कृष्ट अभिनय ने दर्शकों को पूरे समय नाटक से बांधे रखा।

नाटक की निर्देशिका रूचि भार्गव नरूला रहीं, जबकि नाटक के लेखक बसंत कन्नेटकर थे।

इस नाटक की सबसे खास बात यह रही कि वर्ष 1974 में भी यही नाटक पटियाला की सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी में मंचित हुआ था, जिसे मुंबई से आए फिल्म अभिनेता मनमोहन कृष्ण की टीम ने प्रस्तुत किया था। अब 52 वर्ष बाद जयपुर के कलाकारों ने इसे फिर से पटियाला में मंचित कर एक ऐतिहासिक पुनरावृत्ति की।

“ढाई आखर प्रेम का” एक हल्की-फुल्की, संवेदनशील और व्यंग्यात्मक रोमांटिक कॉमेडी है, जो पीढ़ियों के बीच प्रेम की चक्रीय प्रकृति और उसकी विडंबनाओं को दर्शाती है। कहानी एक जीवंत मध्यमवर्गीय परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है।

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प्रोफेसर मार्तंड वर्मा और प्रियम्वदा — जो कभी स्वयं विद्रोही प्रेमी रहे थे — अब अपनी गृहस्थी में रमे हुए हैं। पच्चीस वर्ष पहले उन्होंने अपने प्रेम के लिए परिवार का विरोध झेला था। आज उनकी बेटी बबली अपने प्रिय बाजा बाबू से प्रेम करती है। विडंबना यह है कि कभी विद्रोही रही प्रियम्वदा अब अपनी बेटी के प्रेम का विरोध उसी तरह करने लगती हैं, जैसे कभी उनकी माँ ने किया था।

नाटक प्रेम की इस चक्रीय प्रकृति को हास्य और संवेदना के साथ प्रस्तुत करता है, और इसका मुख्य संदेश है: “वक्त बदल गया, पर मोहब्बत का रंग वही रहा।”

यह मंचन न केवल मनोरंजक रहा, बल्कि प्रेम, परिवार और पीढ़ियों के बीच के रिश्तों पर गहरी सोच भी जगाता रहा। दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय और निर्देशन की खूब सराहना की।

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