– ज्योति जागृति मिशन द्वारा श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का चौथा दिवस सम्पन्न
पटियाला, 5 अप्रैल:
आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी कालिंदी भारती ने वीर हकीकत राय ग्राउंड में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन समुद्र मंथन की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि समुद्र मंथन की यह कथा मात्र पौराणिक घटना नहीं, बल्कि मानव के भीतर निरंतर चल रहे द्वंद्व और आत्म-साक्षात्कार की गहरी प्रक्रिया का प्रतीक है। उन्होने कहा कि आध्यात्मिक दृष्टि से क्षीरसागर हमारा मन है, जिसमें अनंत संभावनाएँ छिपी हैं। देवताओं और असुरों द्वारा किया गया मंथन हमारे भीतर की सकारात्मक (दैवीय) और नकारात्मक (असुरी) वृत्तियों के बीच के निरंतर संघर्ष को दर्शाता है।
साध्वी भारती ने बताया कि सबसे पहले कालकूट विष निकला, जो हमारे अंदर दबे क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार का प्रतीक है। साध्वी जी ने बताया कि दिव्य शांति पाने से पहले इन विकारों का सामना करना और भगवान शिव की तरह उन्हें तटस्थ होकर स्वीकार करना आवश्यक है। जब साधक अपने भीतर के विष को शांत कर लेता है, तभी वह उच्च चेतना के योग्य बनता है।
समुद्र मंथन से प्राप्त चौदह रत्न साधक के मार्ग में मिलने वाली सिद्धियों और मानसिक शक्तियों के प्रतीक हैं। अंत में प्राप्त अमृत आत्म-साक्षात्कार का प्रतीक है, जहाँ मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है और साधक सच्चिदानंद की अवस्था में पहुँच जाता है।
साध्वी जी ने कहा कि समुद्र मंथन हमें प्रेरित करता है कि हम बाहरी चकाचौंध छोड़कर अपने स्व की गहराई में उतरें। जब हम अपने विचारों और भावनाओं का धैर्यपूर्वक मंथन करते हैं, तो अशांति का विष समाप्त होता है और शांति का अमृत प्राप्त होता है।
दशम स्कंध का वर्णन करते हुए साध्वी जी ने भगवान श्री कृष्ण के जन्म और उनकी लीलाओं का बड़ा ही रोचक एवं भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान का जन्म और कर्म दोनों अलौकिक होते हैं। वे जन-कल्याण के लिए इस धरा पर अवतरित होते हैं।
समागम की शुरुआत गुरलाल सिंह (विधायक), तजिंदर मेहता (जिला योजना बोर्ड चेयरमैन), हरप्रीत कौर (पूर्व विधायक), डॉ. प्रणीत कौर ढिल्लों, शरणजीत कौर (लंदन), विजेंद्र कौर (यूएसए), भगवान दास गुप्ता, कमल अग्रवाल, सौरभ जैन , राजन दीप, संजीव शर्मा, राजिता शर्मा, तपिंदर शर्मा, शांभवी शर्मा, चिंतन शर्मा तथा नवजीत कौर जी द्वारा दीप प्रज्वलित करके की गई।
इस दौरान भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव (नंदोत्सव) को बड़े उत्साह से मनाया गया। पूरा पंडाल ‘कृष्ण जन्म भयो आज’ की मधुर धुन पर झूम उठा। चारों ओर पुष्प वर्षा की गई और भक्तगण आनंदमग्न हो गए।कथा का समापन भगवान की भव्य आरती से हुआ।
