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“जो बीजिया वढ़णा पऊ” ने उठाए पारिवारिक मूल्यों पर सवाल, “पहला ते आख़री” ने खोली समाज की परतें

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-24वें समर थिएटर फेस्टिवल का दूसरा दिन

पटियाला, 27 जून
उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, पटियाला और भाषा विभाग, पंजाब के सहयोग से नाटक वाला ग्रुप द्वारा आयोजित 24वें समर थिएटर फेस्टिवल के दूसरे दिन कालीदास ऑडिटोरियम, विरसा विहार केंद्र में दो शानदार नाटकों का मंचन किया गया। इस अवसर पर “जो बीजिया वढ़णा पऊ” और “पहला ते आख़री” नाटकों ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया।

“पहला ते आख़री” नाटक का निर्देशन दलजिंदर बसरा ने किया, जबकि संदीप कैले द्वारा लिखित “जो बीजिया वढ़णा पऊ” का निर्देशन नाटक वाला ग्रुप के सभी कलाकारों ने सामूहिक रूप से किया।

“जो बीजिया वढ़णा पऊ” ने उठाए पारिवारिक मूल्यों और आधुनिक सोच पर सवाल

यह नाटक मानवीय संवेदनाओं और बदलते पारिवारिक रिश्तों पर गहरी चोट करता है। इसमें त्रेता युग के आदर्श पुत्र श्रवण कुमार और आज के आधुनिक युग के पुत्र श्रवण उर्फ़ शैरी के व्यवहार की तुलना दिखाई गई है।

watch…..वक्त बदल गया, पर मोहब्बत का रंग वही रहा….”ढाई आखर प्रेम का” नाटक का सफल मंचन 

जहां श्रवण कुमार अपने माता-पिता की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित करने को तैयार रहते हैं, वहीं आधुनिक श्रवण अपने स्वार्थों को प्राथमिकता देता है। वह माता-पिता से दूरी बनाकर उनकी संपत्ति पर अधिकार करने और उन्हें वृद्धाश्रम भेजने की सोच रखता है। अंत में वही स्वार्थी सोच उसके अपने जीवन में लौटकर आती है और उसका अपना बेटा भी उसे ठुकरा देता है।

नाटक में आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीनों और मोबाइल पर बढ़ती निर्भरता को भी दर्शाया गया। इसमें दिखाया गया कि किस तरह कई बार लोग खून के रिश्तों से ज्यादा मोबाइल और आभासी रिश्तों को महत्व देने लगे हैं।

इस नाटक में कविता शर्मा, राजेश शर्मा, संदीप कैले, पुखराज राणा, इंद्रजीत सिंह, अवीनूर, राजिंदर सिंह और हरसिमरन सिंह ने प्रभावशाली अभिनय किया।

“पहला ते आख़री” ने सामाजिक दोहरेपन को किया उजागर

दूसरा नाटक “पहला ते आख़री” भी दर्शकों के बीच काफी सराहा गया। यह नाटक समाज में मौजूद दोहरे चरित्र वाले इंसान के संघर्ष और सामाजिक कुरीतियों को उजागर करता है।

प्रसिद्ध लेखक जॉन गॉल्सवर्दी की रचना पर आधारित इस नाटक में अविंदर कौर, दलजिंदर बसरा और गोरकी ने अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया।

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में रंगकर्मी, नाटक निर्देशक, समाजसेवी और कला प्रेमी मौजूद रहे।

समर थिएटर फेस्टिवल के अंतिम दिन 28 जून को राजेश शर्मा के निर्देशन और मानव कौल द्वारा लिखित नाटक “इल्हाम” का मंचन किया जाएगा।

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