करीब एक महीने से जारी छात्र-युवा आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह फैसला राष्ट्रीय स्तर पर हुई परीक्षा अनियमितताओं, विशेषकर नीट (NEET) पेपर लीक विवाद, और लगातार बढ़ते जनदबाव के बाद आया है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जून से छात्र और युवा संगठन लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करना, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शामिल थी।
अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने “राष्ट्रीय एकता और व्यापक जनहित” को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है ताकि चल रहे विवाद का राजनीतिक दुरुपयोग न हो सके। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों का विश्वास सर्वोपरि है।
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इस्तीफे की खबर सामने आते ही जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया। प्रदर्शन स्थल पर छात्रों ने तिरंगा लहराया, राष्ट्रगान गाया और मिठाइयां बांटकर खुशी जताई। हालांकि आंदोलन के नेताओं ने स्पष्ट किया कि केवल इस्तीफा उनकी सभी मांगों का समाधान नहीं है और परीक्षा सुधार, जवाबदेही तथा कानूनी कार्रवाई जैसे अन्य मुद्दों पर आंदोलन जारी रहेगा।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया, कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष इंतजाम किए गए।
विश्लेषकों के अनुसार, यह इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में सार्वजनिक दबाव के बाद हुए दुर्लभ राजनीतिक फैसलों में से एक माना जा रहा है। आंदोलन ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, युवाओं के रोजगार और सरकारी जवाबदेही जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।




