Homeहिंदीमनोरंजन"दिनकर" की पुण्य तिथि पर 'रश्मिरथी' का सफ़ल मंचन

“दिनकर” की पुण्य तिथि पर ‘रश्मिरथी’ का सफ़ल मंचन

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-नामवर अभिनेता संजय मिश्रा विशेष तौर से उपस्थित रहे

मुंबई , 26 अप्रैल (अमरनाथ प्रसाद)

नामवर साहित्यकार रामधारी सिंह “दिनकर” जी की पुण्य तिथि पर द पुअर थिएटर कंपनी मुंबई द्वारा बेदा ब्लैक बॉक्स, आराम नगर – 2 वर्सोवा-अंधेरी वेस्ट – मुंबई, वेदा फैक्टरी सभागार में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली से स्नातक हरीश हरिऔध निर्देशित व अभिनीत सुरभि ,बेगूसराय ,बिहार की प्रस्तुति रामधारी सिंह “दिनकर” की कालजयी रचना रश्मिरथी का सफ़ल मंचन किया गया। खण्डकाव्य रश्मिरथी के प्रथम सर्ग से लेकर सप्तम सर्ग तक पूरे रश्मिरथी का सफ़ल नाट्य मंचन एकल अभिनय के साथ प्रतिभाशाली अभिनेता हरीश ने किया। समागम में वरिष्ठ रंगकर्मी फिल्म अभिनेता संजय मिश्रा , विनीत कुमार , हेमंत पांडेय, दीपराज राणा, विनीत शर्मा , श्याम पाठक विशेष तौर से उपस्थित रहे।

प्रेक्षागृह में उपस्थित दर्शकों ने एक प्रभावशाली नाट्य मंचन के रूप में पूरे नाट्य प्रस्तुति को ख़ूब सराहा और अभिनेता हरीश के सशक्त अभिनय कार्य को दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सम्मान दिया। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कालजयी रचना ‘रश्मिरथी’ में दिनकर जी ने सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को नये सिरे से विश्लेषण किया है। चाहे गुरु-शिष्य के पवित्र सम्बन्धों के बहाने हो, या अविवाहित मातृत्व के बहाने, धर्म के बहाने हो, चाहे छल-प्रपंच के बहाने। इतना ही नही युद्ध में भी मनुष्य के ऊँचे गुणों की पहचान के प्रति ललक का काव्य है ‘रश्मिरथी’। दिनकर कहते हैं जन्म-अवैधता से कर्म की वैधता को नष्ट किया जाना अनुचित है। अपने कर्मों से मनुष्य महान बनता है और उसी एक ही जीवन मे एक और जन्म ले लेता है। क्योंकि मात्र व्यक्ति बन जीवित रहने से बेहतर है व्यक्तित्व बन अमर हो जाना, व्यक्ति मर जाता है किंतु व्यक्तित्व कभी नही मरता, हमेशा संस्मरण में वह अमर रहता है। अतः मनुष्य का मूल्यांकन उसके वंश से नहीं, उसके आचरण और कर्म से ही किया जाना न्यायसंगत है। उक्त काव्यखण्ड में यह भी वर्णित है कि प्रतिभाएँ यदि कुण्ठित हो जाए तो समाज और राष्ट्र को विनाश की खाई में ढकेल देती हैं, इसलिए योग्य प्रतिभा को जन्म, कुल, जाति आदि के नाम पर प्रताड़ित एवं कुण्ठित करना समाज एवम राष्ट्र के लिए दुर्भाग्य का मार्ग प्रसारित करना होता है। ‘रश्मिरथी’ में राष्ट्रवाद के साथ-साथ दलित मुक्ति चेतना का भी स्वर है। कर्ण के चरित्र का उद्धार एक तरह से नई मॉनवता की स्थापना का ही प्रयास है।


गौर हो संस्था द पुअर थिएटर कंपनी एक गैर लाभकारी संगठन है। जो थिएटर प्रोग्रामिंग, सामाजिक जागरुकता और सकारात्मक सलाह, प्रदर्शन कला, मनोरंजन और संस्कृति गतिविधियां दर्शकों व कलाकारों के लिए समय-समय पर मंच प्रदान करता है। इसका उद्देश्य मुंबई में काम करने वाले देश के विभिन्न शहरों से आए रंगकामियों को फिर से थिएटर से जोड़ने के लिए जो अपने पेशे के अलावा रंगकर्म करना चाहते हैं, उन्हें उचित स्थान देने के लिए ही इस संस्था का गठन किया गया है।
मंच संचालन जंयत गाडेकर (रानावि) ने किया तथा प्रकाश संयोजन – संजय सोनु (रानावि) और वाद्य वादन – सदा मल्लिक ने किया। मंच व्यवस्था – आशुतोष दुबे ने किया। द पुअर थिएटर के दुर्गेश कुमार , हिमांशु तलरेजा ने सभी उपस्थित अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया ।
ज्ञात हो कि सुरभि बेगूसराय ने विगत 15 अप्रैल को इसी सभागार में नट रंगभूमि थिएटर सोसाइटी के मनीष शिर्के जी के आयोजन में इसी “रश्मिरथी” एकल नाटक की प्रथम प्रस्तुति करवाई थी। जिसके मुख्य अतिथि सिने अभिनेता दीपक काजीर केजरीवाल तथा रवि झांकल थे। अतिथियों के हाथों प्रस्तुति में शामिल सभी कलाकारों को नट रंगभूमि द्वारा प्रशंसा-पत्र दिया गया था

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