पटियाला, 9 जुलाई
30 कवियों और साहित्यकारों की मौजदूगी में साहित्य कलश पत्रिका की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन जी.के. इंस्टीट्यूट के प्रांगण में किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ
गोष्ठी का उद्घाटन मां सरस्वती के चरणों में नमन के साथ दीप प्रज्ज्वलन की परंपरा के साथ हुआ। मंच संचालिका मनु वैश्य ने सभी का स्वागत और अभिवादन करते हुए विधिवत काव्य गोष्ठी की शुरुआत की।
काव्य पाठ और प्रस्तुतियां
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अनुप्रीत भट्टी और पूर्ण स्वामी ने सबसे पहले अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
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पुनीत गोयल ने “आई लव यू”, कृष्ण धीमान ने “कोई धोखे नाल मारे”, खुशप्रीत ने “दिल की दहलीज”, अलका अरोड़ा ने “कुर्सी की चिंता”, और कुलविंदर कुमार ने पंजाबी लघु कथा प्रस्तुत की।
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गुरप्रीत सिंह ढिल्लों ने एक लोक गीत गाकर सभी का मन मोह लिया।
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विजय कुमार ने “किसी की दिल्लगी होगी”, शालू जिंदल ने “मुझे याद रखना”, विश्वजीत ने “मैं ना आगे हूं”, और जगदीश जग्गी ने “इक नूर तो” रचनाओं से समां बांधा।
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कृष्ण धीमान, डॉ. राकेश वर्मा, डॉ. अजय सिंगला, और कुलजीत कौर धंजू ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया।
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अमृतपाल सिंह काफ़ी ने “आंखें फिर नम होंगी”, और बजिंदर ठाकुर ने पत्नी पर हास्य गीत गाकर सभी का दिल जीता।
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श्रवण कुमार की ग़ज़ल “तू है तो”, पंकज कौशिक की “गर चाहते हैं”, अनीशा अंगरा की “अधूरी सी कहानी है मुहब्बत”, हरिदत्त हबीब की “परिंदे तुमने पाले”, और परविंदर शोख की “तुझे यह फिक्र है” ग़ज़लों ने तालियों और प्रशंसा की बौछार बटोरी।
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त्रिलोक सिंह ढिल्लों ने पंजाबी गीत “शोर बहुत है” प्रस्तुत किया।
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मनु वैश्य ने “मैं कौन हूं” कविता का पाठ किया।
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पत्रिका का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान साहित्य कलश पत्रिका का विमोचन किया गया। साहित्य कलश पब्लिकेशन के संस्थापक सागर सूद ने अपनी खूबसूरत ग़ज़ल “आप जबसे ख़फा हो गए” प्रस्तुत की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में दिनेश सूद, पवन गोयल, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, और प्रिंसिपल मंजू ने शिरकत की।
