पटियाला, 12 अक्टूबर
श्री रामलीला प्रबंधक कमेटी और जोड़िया भट्ठियां रॉयल यूथ क्लब की ओर से पटियाला में श्री रामलीला का भव्य आयोजन किया जा रहा है। प्रधान वरुण जिंदल की देखरेख में 11 अक्टूबर से शुरू हुई श्री रामलीला का मंचन 20 अक्टूबर, दशहरे तक जारी रहेगा। इस धार्मिक आयोजन में भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप को विभिन्न धार्मिक एवं प्रेरणादायक प्रसंगों के माध्यम से सुंदर और भावनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया जा रहा है।
प्रधान वरुण जिंदल ने बताया कि प्रसिद्ध निर्देशक मोहन कंबोज और उनके सुपुत्र एस. कुन्तल कंबोज के निर्देशन में श्री रामलीला के पहले दिन विभिन्न धार्मिक दृश्यों का मंचन किया गया। भगवान श्रीराम के बाल स्वरूप ने दर्शकों का मन मोह लिया। श्रीराम जन्म के प्रसंग के दौरान पूरा पंडाल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया।
इसी क्रम में माता सीता के जन्म तथा उनके बाल्यकाल में शिव धनुष उठाने के मनमोहक प्रसंग का भी मंचन किया गया। इसके अतिरिक्त रावण-नंदी संवाद और रावण-वेदवती संवाद को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। गुरु वशिष्ठ द्वारा चारों राजकुमारों को शिक्षा प्रदान करने के दृश्यों ने भी दर्शकों को प्रभावित किया। कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय के माध्यम से दर्शकों को भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया।
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प्रधान जिंदल ने कहा कि श्री रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारी धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और जीवन मूल्यों को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है। भगवान श्रीराम का जीवन प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके जीवन से हमें सत्य के मार्ग पर चलने, अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने, माता-पिता का सम्मान करने, परिवार के सदस्यों के प्रति प्रेम बनाए रखने और कठिन परिस्थितियों में भी मर्यादा का पालन करने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और नैतिक मूल्यों से परिचित करवाना बेहद आवश्यक है। श्री रामलीला जैसे धार्मिक आयोजनों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को जानने और समझने का अवसर मिलता है। भगवान श्रीराम का आदर्श जीवन त्याग, संयम, कर्तव्यनिष्ठा, भाईचारे और पारिवारिक एकता का संदेश देता है। इन आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर समाज में सकारात्मकता, आपसी सद्भाव और प्रेम की भावना को बढ़ावा दिया जा सकता है।
वरुण जिंदल ने शहरवासियों से अपील की कि वे अपने परिवार और बच्चों सहित श्री रामलीला देखने के लिए अवश्य पहुंचें तथा इस धार्मिक आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लें। उन्होंने कहा कि जब बच्चे अपने परिवार के साथ ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं, तो उन्हें अपनी परंपराओं और संस्कारों को समझने का अवसर मिलता है। इससे बच्चों में अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना विकसित होती है और परिवार के सदस्यों के बीच आपसी जुड़ाव भी मजबूत होता है।
उन्होंने कहा कि श्री रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े आदर्शों और शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज में प्रेम, भाईचारे, पारिवारिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।





