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नेपाल में अनिल भारती की त्रिभाषायी तुलनात्मक ज्ञान विकास पद्धति पुस्तक का विमोचन

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नेपाली भाषा का पंजाबी और हिंदी के साथ समन्वय सांस्कृतिक निकटता को और मजबूत करेगा: डॉ. अरुण कुमार सिंह

नेपाल/पटियाला, 19 जून

विदेशों में पंजाबी और हिंदी भाषाओं के प्रचार-प्रसार के लिए अभियान चला रहे अंतरराष्ट्रीय लेखक और शिक्षाविद् अनिल कुमार भारती के प्रयासों को उस समय बड़ा बल मिला, जब उनकी लिखित पुस्तक थ्री इन वन लिंग्विस्टिक मैजिक के अंतरराष्ट्रीय संस्करण का विमोचन नेपाल की राजधानी काठमांडू में हुआ। यह विमोचन पंजाबी सभा मास्को, वाल्मीकि विद्यापीठ संस्कृत विश्वविद्यालय, काठमांडू, और चारु साहित्य प्रतिष्ठान, नेपाल द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक संगोष्ठी और सम्मान समारोह के दौरान किया गया।

समारोह में मुख्य अतिथि नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. घनेश्वर, विश्व प्रसिद्ध लीवर रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण कुमार सिंह, और पंजाबी सभा मास्को के अध्यक्ष प्रमोद कुमार धीमान ने संयुक्त रूप से पुस्तक का विमोचन किया। अपने विचार व्यक्त करते हुए कुलपति ने अनिल कुमार भारती की त्रिभाषा और बहुभाषा तुलनात्मक ज्ञान विकास पद्धति की सराहना की और इसे भाषाई समरूपता के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी खोज बताया। उन्होंने कहा कि अनिल कुमार भारती, सुशील कुमार आजाद, प्रमोद कुमार धीमान और उनकी पूरी टीम का भाषाओं को जोड़ने का यह अंतरराष्ट्रीय प्रयास अत्यंत सराहनीय है, जो विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक निकटता को मजबूत करेगा।

पंजाबी सभा मास्को के अध्यक्ष प्रमोद कुमार धीमान ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अनिल भारती और सुशील कुमार आजाद के संयुक्त प्रयासों का ही नतीजा है कि रूस में पंजाबी और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए मास्को के बैसाखी कार्यक्रम में अनिल कुमार भारती की पुस्तक का विमोचन किया गया था। इससे रूसी लोगों के लिए पंजाबी, अंग्रेजी और हिंदी भाषाओं का ज्ञान प्राप्त करना आसान हो गया है।

WATCH……International writer Anil Bharti was honored with a gold medal and a certificate of appreciation in Nepal

इस सम्मेलन में भारत, नेपाल, नीदरलैंड सहित कई देशों के विद्वानों और डॉक्टरेट शोध छात्रों ने हिस्सा लिया। अपने संबोधन में डॉ. अरुण कुमार सिंह ने कहा कि सनातन धर्म वैश्विक समुदाय के भाईचारे में विश्वास रखता है और पूरी पृथ्वी को एक परिवार मानता है। अनिल कुमार भारती की यह पुस्तक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाली और हिंदी भाषाओं की लिपि समान है, जिससे इनके बीच आपसी समझ विकसित करना और आसान है। यदि इस दिशा में गंभीर प्रयास किए गए तो भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक साझेदारी को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

अपने भाषाई शोध के बारे में बताते हुए अनिल भारती ने कहा कि उन्होंने भाषाई सद्भाव और एकता के माध्यम से प्रेम, स्नेह और भाईचारे का संदेश भारत की पवित्र भूमि से मित्र देश नेपाल की पवित्र भूमि तक पहुंचाया है और इसे विश्व स्तर पर फैलाने का प्रयास किया है। इस कठिन कार्य में उन्हें अंतरराष्ट्रीय लेखक और शिक्षाविद् सुशील कुमार आजाद और पंजाबी सभा मास्को के अध्यक्ष प्रमोद कुमार धीमान का पूर्ण सहयोग मिला है।

WATCH……https://www.youtube.com/watch?v=MM4900dxPaA

इस शुभ अवसर पर कार्यक्रम की आयोजक डॉ. मोनिका शर्मा, केंद्रीय विद्यालय भारतीय दूतावास काठमांडू की प्राचार्या ए. गेराल्ड, डॉ. आनंद कुमार त्रिपाठी, नरपत चौहान, संस्कृत विद्यापीठ के प्राचार्य अच्युता प्रसाद, देवी पंथी, नीना शर्मा, नीलम अरोड़ा, और घनश्याम न्यौपाने ने भी अपने विचार साझा किए।

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